हमने स्वीकार कर लिया, तुम्हें स्वीकार नही।
पर शायद एक याद बनकर… कभी-कभी याद आ ही जाऊँ।
लोग हुस्न पर फिदा होकर उसे इश्क कह देते हैं
क्योंकि ये कफन बार बार हटाया नहीं जाता…!
तुम्हारे साथ भी बर्बाद थे तुम्हारे बाद भी बर्बाद हैं…!
जिन्हें मिलती मंज़िल उंगलियों पे वो खुश है।
हर शाम ढल जाती है… बस उसके कदमों की आहट बची रह जाती है।
जिसे जान से ज़्यादा चाहो… वही ज़रूर रुलाता है।
की आदमी ही आदमी को जाल में फसाने लगा है…!
क्योंकि वो बड़े लोग हैं अपनी मर्जी से Sad Shayari in Hindi बात करेंगे…!
गुमान तक ना हुवा की वो बिछड़ने वाली है !
किसी के पास यकीन का कोई इक्का हो तो बताना,
कुछ कहानियाँ बिना अलविदा कहे ही खत्म हो जाती हैं,
किस्मत कुछ ऐसी थी के चैन से जीने की हिम्मत ना हुई,